इस लेख की शुरुआत करते हैं जहाँ आप पाएँगे — Greeting Cards एवं सभी Good Morning Wishes Collection के लिए एक सम्पूर्ण संसाधन। हर सुबह को विशेष बनाने के लिए “good morning wishes in Hindi”, “good morning hindi messages”, “good morning msg in hindi” जैसे कीवर्ट्स का उपयोग यहाँ किया गया है।
Key Sections
परिचय
सुबह-की पहली किरण केवल दिन की शुरुआत नहीं होती, बल्कि यह नए भाव, नए अवसर, नए विचार लेकर आती है। जब हम अपने प्रियजनों को “good morning wishes in Hindi” भेजते हैं, तो हम उन्हें सिर्फ शुभप्रभात ही नहीं कह रहे होते, बल्कि उन्हें यह संकेत दे रहे होते हैं कि हम उनके जीवन की शुरुआत का हिस्सा बनना चाहते हैं, उनके दिन को बेहतर बनाना चाहते हैं।
मेरे व्यक्तिगत अनुभव में, जब मैंने किसी कठिन समय से गुजरते दोस्त को एक सरल “सुप्रभात” संदेश भेजा था जिसमें सिर्फ “आज का दिन तुम्हारे लिए उजला हो” लिखा था, तो उसकी प्रतिक्रिया ने मुझे चौंका दिया:
“यह संदेश मुझे लगा जैसे तुम मेरे सुबह के साथ हो।”
यह छोटा-सा उदाहरण दिखाता है कि कितनी पावर होती है एक संभवनीय, सहज संदेश में।
मुख्य अंतर्दृष्टियाँ
- संबंध और समय-संबंधितता – सुबह का संदेश तभी असरदार होता है जब उसमें “आज सुबह”, “नई शुरुआत”, “तुम्हारे लिए यह दिन” जैसे तत्व हों।
- भाषा-सरलता और उत्साह – सरल हिंदी, सहज शब्द, उत्साही लहजा बेहतर काम करता है। उदाहरण के लिए, “तुम्हारी मुस्कान से दिन शुरू हो” बेहतर लगता है।
- शैली का चयन – संदेश को व्यक्ति-अनुकूल बनाना बेहतर: यदि यह मित्र के लिए हो, तो हल्के-फुल्के अंदाज़ में; यदि यह प्रेम-संबंध के लिए हो, तो कोमल प्रेम-भावनाओं के साथ; यदि यह मोटिवेशनल हो, तो प्रेरक लहजे में।
- कविता तथा शायरी का विकल्प – कभी-कभी सिर्फ एक पंक्ति या दो की कविता या शायरी भी संदेश को खास बना देती है।
- समय-प्रसंग का ध्यान – सुबह का संदेश भेजने का समय भी मायने रखता है। जैसे यदि किसी को ऑफिस जाना है या परीक्षा है, तब इसे और भी ध्यान से तैयार करें।
अब आगे, मैं आपके लिए 80 “good morning wishes in Hindi” कविताएँ / संदेश प्रस्तुत कर रहा हूँ। हर 10 संदेशों के बाद एक उप-शीर्षक होगा ताकि आप नेविगेशन में सुविधा महसूस करें।
संदेश / कविताएँ 1-10
सुबह की हल्की किरण कहती है,
थोड़ी सी मुस्कान ले आओ आज।
तुम्हारे दिन में रंग-बिखेरें,
सुप्रभात! हो उजाला और विश्वास।
नया दिन, नए अवसर साथ लाया है,
तुम्हारी हँसी में शुरुआत हो खुशियों की छाया है।
उठो, खिलो, मुस्कुराओ हर क्षण,
सुप्रभात मेरे दोस्त, हो शुभ प्रभात का साया है।
काश हर सुबह हो इसी अंदाज़ में,
जहाँ तुम हो, वहाँ हो प्रकाश में।
दिल से निकलें यह दुआ आज तुम्हारे नाम,
सुप्रभात! हो तुम्हारा दिन उत्तम, आराम में।
हाथ में चाय की प्याली, आँखों में सपने,
तुम्हारी राहें सजें, हों सफल और संतरे।
सुप्रभात! हो तुम्हारे कदम नए अनुभवों से भरें,
हर मुस्कान हो सच्ची, हर पल हो तेरे द्वारे।
सुबह की हवा में ताज़गी, सुबह की चिड़ियों में गीत,
तुम्हारे दिल में हो उमंग-सी, हर लम्हा हो रीत।
सुप्रभात! यह दिन हो तुम्हारा, शुरुआत हो नई कहानी-सी,
खुशियों की वर्षा हो, सफलता हो तुम्हारी निशानी-सी।
दिन की शुरुआत हो जैसे फूलों की कुशबू,
हर राह हो सुगम, मिले तुम्हें हर खुशी का दृष्टू।
सुप्रभात मेरे प्रिय, हूँ तुम-सपनों की उड़ान में,
आज का दिन हो खास, जीवन हो मधुर और महान में।
आइए आज हम भूलें कल की चिंता,
उठें यह सुबह नए इरादों की रास्ता बना।
सुप्रभात! हो तुम-सपनों की उस उड़ान के साथ,
जहाँ सफलता का आकाश हो तुम्हारा-साथ।
हँसते हों होंठ, चमकती हों आँखें —
तुम्हारे लिए खुली हो राहें और हर पल हो नई सौगातें।
सुप्रभात! हो तुम्हारी सुबह उत्साह-भरी,
जीवन में हो प्रकाश, समय हो तुम्हारी जीतें।
जब तुम उठो इस सुबह, तो याद रखना —
हर दिन का उपहार है, उसे स्वीकार करना।
सुप्रभात! हो तुम-सफलताओं की कहानी लिखने वाले,
खुद की राह चुनने वाले, प्रेरणा बनने वाले।
आज हो सुनहरा आरंभ, तुम हो शक्ति-संपन्न,
तोड़ो सभी सीमाएँ, पहुँचो हर मंजिल के चरण।
सुप्रभात! तुम्हारा दिन हो गर्व-भरा,
जीवन हो विजय-पथ, आपकी मुस्कान हो अमर।
संदेश / कविताएँ 11-20
पहली किरण बोली- “खुल जा, जगमगा ले”,
तुम्हारी मुस्कान हो-जैसे धूप में खेलते।
सुप्रभात! हो तुम्हारा दिन —
खुशियों, सफलता, प्रेम से भरा हो, बस ऐसे ही चले।
चाय की भाप हो हल्की-सी, सोच हो नई-नई,
तुम्हारे होंठों पर हो गीत-सा सुकून-भरा बीज।
सुप्रभात! हर पल हो तुम्हारा मित्र,
हर सुबह लाये अवसर-का-दीन, हर शाम हो तुम्हारी जीत।
निश्चय करो आज-और उठो जागो,
तुम्हारा दिन हो तेरे साहस का भागो।
सुप्रभात! हो तुम-नव क्षितिज के शिखर,
जहाँ सफलता मुस्कुराती हो तुम्हारे कदमों के नज़र।
उड़ान भरो आसमान में, मत घबराओ तुम-कभी,
तुम्हारे साथ है उम्मीद की डोर, भविष्य की धुन सुनो ज़रूर-कभी।
सुप्रभात! हो तुम्हारी सुबह-ज्यों रूहानी संगीत,
जहाँ तुम-स्वयं हो लेखक-अपनी कहानी की प्रीत।
दिन हो तुम्हारा-खुशियों का मेला,
रात हो सोने-की नहीं, सपनों का वेला।
सुप्रभात! हो तुम-उस सूरज-का पहला प्रकाश,
जिसने मिटाई हो अँधेरों की परतें, लाया हो नयापन एवं आस।
तुमसे बढ़कर हो कोई शुरुआत नहीं,
तुम्हारे जीवन में खिलें खुशियों की सतत बहार हो।
सुप्रभात! हो तुम्हारी मुस्कान-एवँ समाधान,
हर समय हो तुम्हारी-सफ़लता-का-सत्र।
हवाओं में घुली-ताजी सोंधी खुशबू,
तुम्हारे लिए जीवन हो-खुला गुलदस्ता अनमोल।
सुप्रभात! हो तुम्हारे ख्वाब-पंख खोलने का अवसर,
सफलता-का-पंख लगाएं तुम-और उड़ चलें निर्भय।
आज इस सुबह-तेरे नाम करे शुरुआत,
जहाँ तुम हो-विश्वास की डोर पकड़े हाथ।
सुप्रभात! हो जिंदगी-का-सोना दिन,
जहाँ तुम-मुख्य किरदार-और खुशी हो ताज।
तेरी मुस्कान हो जैसे-सुबह-की पहली बूँद,
जो छूते ही हो धरती-पर अमृत-की खुशबू।
सुप्रभात! हो तुम्हारा दिन-अद्भुत,
तुम्हारी राह-फूलों-से सजती-और प्यार-से बँधी।
हर सुबह कहती है- “ये एक उपहार है”,
तुम्हारे हाथ में वक्त की एक-नई हथियार है।
सुप्रभात! उठो और करो यह सोच-संगठन,
कि दिन तुम्हारा है-तुम हो उसकी रचना-और उसकी धड़कन।
(इसी तरह आगे 60 संदेश और होंगे…)
संदेश / कविताएँ 21-30
सूरज की किरणें हो जैसे-तुम्हारे विचार,
दिन हो तुम्हारी-मुस्कान-से और भी पार।
सुप्रभात! हर सुबह हो-नई शुरुआत का आह्वान,
जहाँ तुम हो-विश्वास-की ओर बढ़ता-मान।
टिमटिमाती-हवाएँ ले आईं-नयी ऊर्जा,
तुम्हारे लिए हो-हर मोड़-पर खुली दिशा।
सुप्रभात! हो तुम्हारे कदम-हौसले से भरे,
जीवन हो-खुशियों-के झूले पे सजे।
कल की चिंताएँ छोड़ो, आज का दिन तुम-अपनाओ,
हर पल में छुपा-है आनंद-जगाओ।
सुप्रभात! हो दिन-तुम्हारा-सपनों-से लैस,
जहाँ तुम-स्वयं-हो-उदाहरण-और-प्रेरणा-कैसे।
तीर-सा हो लक्ष्य-और-बाण-हमारा-इरादा,
तुम्हारे संग हो-हर सुबह-सहारा।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-उड़ान-बिना सीमा,
जहाँ तुम-मिलो-अपनी-कहानियों-से-खुदा-की-मीमांसा।
हँसते हों होठ-और खिलते हों चेहरे,
तुम हो-उन-शुरुआतों-का कारण-जिन्हें याद रखें समय-के-चेहरे।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-ज्यों-सपनों-का-गीत,
जहाँ तुम-मुख्य-रचयिता-खुशी-की-रात-और-प्रात।
चाहें जो भी-मंजिल-उसे-चूमो,
उठो-आज-और-विश्वास-से-भूमो।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-शुरुआत-दृढ़-और-नविन,
तुम्हारी-कदम-हों-उन-राहों-पर-जिन्हें-ने-खोला-है-दिन।
जीवन-का-सफर-हो-मस्ती-का-मेला,
तुम-हो-उस-मौके-के-मुख्य-पात्र।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-सुबह-भर-उत्साह-और-प्रेरणा,
और-हर-दो-घड़ी-हो-तुम-के-नाम-का-गीत।
उठो-और-भर लो-हवा-में-ख्वाबों-का-पंख,
तुम्हारी-उड़ान-हो-ऊँची-और-व्यापक-रंग।
सुप्रभात! हो यह-दिन-तुम्हारी-रचना,
जहाँ तुम-हो-खुशी-की-सृष्टि-और-जीवन-की-कहानी।
हर सुबह-एक-आशा-का-सन्देश-लाती-है,
तुम-हो-उस-आशा-की-चमक-और-उस-सन्देश-की-मजबूती।
सुप्रभात! हो तुम-जीवन-के-सूरज-की-पहली-किरण,
और-तुम्हारी-हँसी-हो-धूप-में-छाँव-का-हस्ताक्षर।
आज-उठो-और-दुनिया-को-हँसाओ,
तुम्हारी-ऊर्जा-हो-हर-दुश्वार-का-प्रनाओ।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-सफलताओं-की-शुरुआत-,
तुम-हो-उम्मीद-का-रूप-और-खुशी-का-आँचल।
संदेश / कविताएँ 31-40
सुबह-की-ठंडी-हवाएँ-कहती-हैं-“जी ले”,
तुम-हो-उन-लम्हों-का-मुख्य-साथी।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-ऊँचाइयाँ-रसातल-से-ऊपर,
जहाँ तुम-हो-स्वयं-के-सपनों-से-असरदार।
चलो-आज-एक-नए-इरादे-से-शुरुआत-करें,
तुम-हो-विश्वास-की-डोर-और-मैं-हो-साथ-तय्यार।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-रंग-भरा-,
और-तुम-हो-हर्ष-का-प्रसाद-सदा-का-।
हँस लो-आज-और-हर-चुनौती-को-स्वीकार-करो,
तुम-हैं-उस-सूरज-की-किरण-जो-अँधेरे-को-डराओ।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-मुश्किल-राहों-में-रोशनी-,
और-तुम-हो-उसे-दौरने-वाले-घोड़े-के-सहारे-।
नई-सोच-नई-उड़ान-नई-कहानियाँ-बुनो,
तुम-हो-उन-पन्नों-के-लेखक-जो-आज-लिखे-जाएँ।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-सुबह-विस्तृत-और-सजीव-,
जहाँ-तुम-हो-खुशी-का-सुर-और-उत्साह-का-गीत।
दिल-में-हो-शांति-और-हों-उम्मीद-की-उड़ान,
तुम-हो-उस-हवा-का-रुक-ना-पाना-जो-आगे-बढ़े।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-शुरुआत-पर-सफलता-की-महर-,
और-तुम-हो-हर-ख्वाब-का-साक्षी-वास्तविक-करने-वाले-।
जब-तुम-उठो-इस-सुबह-तो-याद-करो-कि-एक-पैगाम-है,
तुम-के-लिए-जो-ले-के-आया-है-खुशियों-का-सामान।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-उस-पसंदीदा-गीत-की-तरह-,
जिसे-हम-हर-दिन-गुनगुनाते-हैं-जीवन-की-राग-में।
चाँद-छिप-गया-और-सूरज-ने-किया-स्वागत,
तुम-हो-उस-सूरज-का-सहारा-जो-रोशन-कर-दे-रात-।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-सुबह-जैसे-नए-वर्ष-की-शुरुआत-,
जहाँ-तुम-हो-गौरव-की-लहर-और-सफलता-का-साथ-।
रास्ते-खुलें-और-हों-सपने-साकार,
तुम-हो-उन-यात्राओं-के-साथ-जो-हैं-अनंत-और-अद्भुत।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-हर-उम्मीद-का-सफ़र-,
और-तुम-हो-हर-लम्हे-का-साथ-और-हर-घड़ी-का-पक्षी-।
सोचो-कि-आज-समय-है-एक-उपहार-और-तुम-हो-उस-उपहार-की-रचना,
तुम्हारी-हर-मुस्कान-बने-एक-नयी-शुरुआत-की-कबूतर।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-जैसे-खुला-आकाश-,
जहाँ-तुम-उड़ो-अपने-सपनों-की-पंखों-से-स्वतंत्र-और-शानदार।
चलो-आज-उठाएं-एक-नया-कीमत-का-कदम,
तुम-हो-उस-कीमत-जिसे-दुनिया-माप-नहीं-सकती-।
सुप्रभात! हो तुम-उम्मीद-की-किरण-,
और-तुम्हारी-सुबह-हों-जीवन-का-उत्सव-,
जहाँ-तुम-हों-मुख्य-आयोजन-और-खुशी-का-स्वामी-।
संदेश / कविताएँ 41-50
सुरज की पहली किरण कहती है- “उठो”,
और-तुम-हो-उस-किरण-की-माय − जो-थामे-हैं-उम्मीदों-का-साथ।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-सपनों-का-वसंत-,
और-तुम-हो-उसे-उड़ान-देने-वाले-शब्द-की-शक्ति-।
अँधेरे-के-बाद-आती-हैं-रौशनी-की-लहरें,
तुम-हो-उन-लहरों-का-संग-और-उन-लहरों-की-तरह-उठो।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-सुबह-हों-खुशियों-का-विकास-,
और-तुम-हो-आगे-बढ़ने-की-प्रेरणा-की-आसन।
आज-तुम-हों-सुबह-की-मुख्य-मेहमान-,
और-उस-मेहमान-को-दे-दो-खुशियों-का-भोजन-।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-विचार-से-भरा-,
और-तुम-हो-चुनौतियों-का-साहस-और-जीत-का-प्रतीक-।
जब-तुम-हों-सवेरे-उठकर-हँसते-हैं,
तो-दुनिया-भी-हँसती-है-तुम-के-साथ-।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-सुबह-हो-महक-सी-फूल-की-,
और-तुम-हो-उस-महक-का-स्रोत-,
जिसने-सजा-दे-तुम्हारे-हर-दिन-को-चमक-में-।
तुम्हारी-उम्मीद-हों-उस-किरण-की-तरह-,
जो-टूट-ना-सकती-है-और-बिखर-ना-सकती-है-।
सुप्रभात! हो-तुम-उस-सवेरे-का-संग-,
जहाँ-हिम-की-ठंड-भी-गोली-हो-तुम-की-मुस्कान-से-गर्म-।
हार-न-माना-है-जब-सपना-हो-बड़ा-,
तो-उठो-आज-और-दिखाओ-दुनिया-को-तुम-का-किया-है-हौंसला-।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-उन-बड़ों-सही-,
जो-खुद-हैं-उदाहरण-और-तुम-उन-का-अनुकरण-।
चाहे-तूफ़ान-आए-या-सूरज-बैठे-होट-,
तुम-हों-उस-स्थिति-का-सामना-करने-का-साहस-।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-सुबह-हो-विजय-का-चिह्न-,
और-तुम-हों-उस-चिह्न-का-लेखक-जो-लिखे-अनंत-कहानियाँ-।
हवाओं-में-गूँज-रही-है-नई-उम्मीद-की-लहर,
तुम-हों-उस-लहर-का-सागर-और-तुम-हों-उस-सागर-का-राहगीर-।
सुप्रभात! हो तुम-अपनी-कहानी-का-नायक-,
और-तुम्हारा-दिन-हों-बैठक-का-कविता-,
जिसे-हर-रौनक-से-पढ़ा-जाएगा-दिल-से-।
सुबह-कि-शरुआत-हो-विचार-की-चाबी-से,
तुम-हों-उस-चाबी-का-दरवाज़ा-और-तुम-हों-उस-दरवाज़े-के-पथिक-।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-हर-मंजिल-हो-पास-,
और-तुम-हो-उस-मंजिल-के-सपने-को-जीने-वाले-।
आज-तुम-उठो-और-अपने-हृदय-में-रखो-सब-कुछ-महत्वपूर्ण-,
क्योंकि-सुबह-की-खुशियाँ-हो-उस-प्रेरणा-की-चाबी-।
सुप्रभात! हो-तुम-उस-खेल-के-खिलाड़ी-,
जिसने-अपना-दिन-जीत-लिया-और-दिया-सब-को-हँसी-की-चाबी-।
संदेश / कविताएँ 51-60
जब-तुम-हों-उठकर-हवा-से-कहते-हैं-“मैं-तैयार-हूँ”,
तो-हवा-भी-रुक-जाती-है-तुम-की-उड़ान-को-देख-कर-।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-खुला-आसमान-की-तरह-,
और-तुम-हों-हों-उस-आसमान-के-सपनों-के-साथ-।
ख्वाब-हैं-तो-उड़ान-होगी-, भरो-विश्वास-अपना-,
क़दम-रखो-उस-राह-पर-जो-अब-तक-अनदेखा-।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-सुबह-हों-नव-उम्मीद-की-,
और-तुम-हों-नव-सफ़र-के-संग-औऱ-नव-प्रस्ताव-के-साथ-।
हर-पल-हों-खास-, जब-तुम-उठो-और-हँसो-सह-,
तुम-हों-उस-चमक-का-कारण-जो-अँधेरों-में-भी-रह-जाए-जीवंत-।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-हो-प्रेरणा-का-स्रोत-,
और-तुम-हों-उस-स्रोत-के-पानी-की-एक-बूँद-जो-जीवन-बन-जाए-।
सुबह-की-चुप्पी-में-छुपी-हो-कुछ-सन्देश-,
तुम-हों-उस-सन्देश-को-पढ़-कर-नए-सपने-बुन-ते-हैं-।
सुप्रभात! हो तुम-सपनों-की-कच्ची-मिट्टी-का-कौशल-,
और-तुम्हारा-दिन-हों-रंग-भरा-और-खुशियों-का-मेला-।
आज-उठो-और-दिखाओ-दुनिया-को-कि-तुम-तैयार-हो-,
तुम-हों-उस-सूरज-की-किरण-जो-दिन-को-चुनती-हो-।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-सुबह-हों-उन-लम्हों-की-शुरुआत-,
जहाँ-तुम-हों-मुख्य-किरदार-और-हर-सपना-हो-साकार-।
छोड़ो-पीछे-वो-कल-जिसमें-है-दिखावटी-उम्मीद-,
आज-के-दिन-में-है-वास्तविक-संभावना-और-सच्ची-खुशी-।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-हों-सकारात्मक-सोच-का-,
और-तुम-हों-उस-सोच-का-अभिनव-प्रतीक-।
जब-तुम-हों-विश्वास-से-भरे-,
तो-सूरज-भी-छुप-ना-चाहे-तुम-के-सामने-।
सुप्रभात! हो तुम-उस-उम्मीद-का-सपना-,
और-तुम-हों-उस-सपने-का-साकार-करने-वाले-।
सुबह-की-रौशनी-है-तुम-के-सपनों-की-चाबी-,
उठो-और-खोलो-उस-द्वार-को-जो-जीवन-से-बंधा-है-तुम-से-।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-हों-खुला-और-सृजन-भरा-,
और-तुम-हों-उस-सृजन-के-कलाकार-।
हर-सपना-है-एक-दिशा-, हर-उठान-है-एक-प्रयास-,
आज-तुम-हों-उस-प्रयास-का-प्रारम्भ-,
और-तुम-हों-उस-दिशा-का-नेता-।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-सुबह-हों-शानदार-और-तुम-हों-प्रेरणा-का-स्रोत-।
आज-तुम्हारा-समय-है-, आज-तुम्हारी-कहानी-है-,
उठो-और-लिखो-उस-पन्ने-को-जो-बने-जीवन-की-धरोहर-।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-रंगीन-और-तुम-हों-उस-दिन-का-नायक-।
संदेश / कविताएँ 61-70
सुबह-की-हवा-में-घुली-हो-ताजी-उम्मीद-की-खुशबू-,
तुम-हों-उस-खुशबू-के-सह-जिस-ने-सजा-तुम्हारे-दिन-को-।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-हों-सपनों-की-उड़ान-,
और-तुम-हों-उस-उड़ान-का-वाहक-।
उठो-और-देखो-कि-आज-की-सुबह-है-तुम्हारे-नाम-,
तुम-हों-उस-सुबह-का-सूरज-और-तुम-हों-उस-नाम-का-प्रकाश-।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-हों-मुस्कान-की-चटक-,
और-तुम-हों-उस-मुस्कान-का-कारण-।
हर-नया-सुबह-है-एक-अवसर-, हर-अवसर-है-एक-उपहार-,
उठो-और-स्वीकार-करो-यह-उपहार-खुलकर-।
सुप्रभात! हो तुम-उस-उपहार-का-सर्वश्रेष्ठ-उपभोक्ता-,
और-तुम्हारा-दिन-हो-उस-उपहार-का-उप्रभात-।
चाहे-रास्ते-हो-कठिन-या-हो-सामान्य-,
तुम-हों-उन-रास्तों-के-प्रकाश-का-सहारा-।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-सुबह-हों-शक्ति-की-धारा-,
और-तुम-हों-उस-शक्ति-का-प्रवाह-।
तुम्हारी-हँसी-हो-एक-सुर-, तुम्हारी-आँखों-में-बसा-है-एक-विश्व-,
उठो-और-दिखाओ-दुनिया-को-कि-तुम-हैं-विशिष्ठ-।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-हों-रचनात्मक-और-सजीव-,
और-तुम-हों-उस-दिन-का-निर्माता-।
जब-तुम-हो-उठकर-नई-शुरुआत-करते-हो-,
तो-दुनिया-भी-हो-तैयार-तुम-का-साथ-देने-के-लिए-।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-सुबह-हों-उन-चुनौतियों-की-जीत-का-प्रस्ताव-,
और-तुम-हों-उन-जीतो-का-स्वामी-।
आज-तुम-हो-वो-शख्स-जिस-का-दिन-बीच-भी-खुश-हो-जाये-,
तुम-हो-वो-सपना-जिस-ने-रुप-ले-लिया-है-वास्तव-में-।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-हों-उत्सव-का-संग-,
और-तुम-हों-उस-संग-का-मुख्य-अतिथि-।
हर-सुबह-है-मौका-नई-सोच-की-, हर-सोच-है-बीज-नई-उड़ान-का-,
तुम-हों-उस-बीज-का-देखभाल-और-तुम-हों-उस-उड़ान-का-निर्देशक-।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-सुबह-हों-उत्साह-से-भरी-,
और-तुम-हों-उस-उत्साह-का-प्रेरणा-।
उठो-और-मायूसी-को-छोड़ो-पीछे-,
तुम-हों-उसे-छोड़ने-वाले-हाथ-जिस-ने-दिन-रोक-रखा-है-।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-हों-खुला-आकाश-की-तरह-,
और-तुम-हों-खुद-उस-आकाश-के-तारों-का-प्रकाश-।
आज-हों-तुम्हारी-मुस्कान-की-पहचान-,
और-तुम-हो-उस-पहचान-के-सपनों-की-सच्ची-मूर्ति-।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-हों-अनुभव-की-मिट्टी-से-सजा-,
और-तुम-हों-उस-अनुभव-का-स्वर्ण-चिह्न-।
संदेश / कविताएँ 71-80
सुबह-की-हवा-लेकर-आई-है-नव-कहानी-,
तुम-हों-उस-कहानी-का-मुख्य-पात्र-और-तुम-हों-उस-कहानी-का-लेखक-।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-हों-सपनों-के-पंखों-से-उड़ा-,
और-तुम-हों-उन-पंखों-की-हवा-का-साहित्यकार-।
दूर-न-सोचो-कि-कल-क्या-होगा-, आज-सोचो-कि-आज-क्या-होगा-,
तुम-हों-आज-का-उपयोग-करने-वाले-और-आज-का-सहारा-लेने-वाले-।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-सुबह-हों-चमक-की-तरह-ताजा-,
और-तुम-हों-उस-चमक-का-निर्माता-।
हर-सपने-में-है-छुपा-है-एक-मकसद-,
तुम-हों-उस-मकसद-का-पता-और-तुम-हों-उस-मकसद-का-सिद्धकर्ता-।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-हों-उत्कृष्ट-और-तुम-हों-उत्कृष्टता-के-अनुरूप-।
उठो-और-होलो-दिल-में-वह-विश्वास-,
जिस-से-हर-परिस्थिति-भी-बन-जाए-मौका-।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-सुबह-हों-साहस-की-शोभा-,
और-तुम-हों-उस-साहस-के-प्रतीक-।
सत्तर-नहीं-बस-आज-की-शुरुआत-है-,
और-तुम-हों-उस-शुरुआत-का-सपना-दिखाने-वाले-।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-हो-अनंत-संभावनाओं-से-,
और-तुम-हों-उस-संभावना-का-जीवंत-प्रतीक-।
जब-तुम-हों-उठकर-हँसते-हैं-,
तो-दुनिया-भी-हँसती-है-तुम-के-साथ-।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-सुबह-हों-खुशियों-का-खेळ-,
और-तुम-हों-उस-खेल-का-चैंपियन-।
उठो-और-अपने-हृदय-को-खोलो-,
क्योंकि-सुबह-है-तुम-के-लिया-,
और-तुम-हों-उस-काल्पनिक-दुनिया-का-वास्तविक-रचनाकार-।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-शानदार-और-तुम-हों-शानदार-का-सहारा-।
हर-सुबह-है-एक-नया-संज्ञापन-तुम-के-लिए-,
कि-तुम-हों-जीवन-का-मुख्य-पात्र-और-तुम-हों-खुशी-का-अधिकार-।
सुप्रभात! हो तुम्हारी-सुबह-हों-अनुभव-की-कुंजी-,
और-तुम-हों-उस-कुंजी-का-सुरक्षित-रक्षक-।
उठो-और-खोले-उठो-अपने-भविष्य-का-दरवाज़ा-,
क्योंकि-सुबह-है-उस-द्वार-की-कुंजी-जिस-ने-तुम्हें-बुलाया-है-।
सुप्रभात! हो तुम्हारा-दिन-हों-खुला-आकाश-का-,
और-तुम-हों-उस-आकाश-की-उड़ान-का-अधिकार-।
आज-हों-तुम-उस-सितारे-के-समान-,
जो-उठता-है-जब-सुबह-हों-आँखों-में-नव-उम्मीद-की-किरण-।
सुप्रभात! हो तुम-खुशियों-के-सूरज-की-पहली-किरण-,
और-तुम्हारा-दिन-हों-प्रकाश-से-भरा-,
तुम-हों-उस-प्रकाश-का-मोती-।
निष्कर्ष
इस रूप में, हमने “good morning wishes in Hindi” की दिशा में एक लंबा-सा लेकिन सारगर्भित सफर तय किया—जहाँ सिर्फ संदेश-संकलन नहीं बल्कि संदेश-को तैयार करने के अंदाज़, भावना, उपयोगिता और व्यक्तिगत स्पर्श पर भी गौर किया गया।
यदि आप किसी विशेष व्यक्ति-के लिए सुबह का शुभ संदेश भेजना चाहें—जैसे-“good morning msg in Hindi for love”, “good morning quotes for friends in Hindi”, या “motivational good morning wishes in Hindi” —तो ऊपर दिए गए 80 में से किसी चुन सकते हैं और थोड़ा-बहुत बदलाव कर उसे और भी खास बना सकते हैं।







